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जिलाधिकारी का आरटीओ ऑफिस में  औचक निरीक्षण,

सात कर्मचारी नदारद – रिश्वतखोरी पर भी खुली पोल”

अनिल वर्मा/अखिलेश शुक्ला

कानपुर।सर्वोदय नगर स्थित आरटीओ कार्यालय में मंगलवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह अचानक निरीक्षण के लिए पहुँचे। डीएम की गाड़ी जैसे ही गेट पर रुकी, अफसरों और कर्मचारियों में भगदड़-सी मच गई। कुछ कर्मचारी तो सीट छोड़कर बाहर निकल गए, जबकि कई कुर्सियों पर मानो अवकाश का माहौल छा गया।

सात कर्मचारी नदारद, कटेगा वेतन

निरीक्षण में सुबह 10:35 बजे तक अटेंडेंस रजिस्टर की जाँच की गई। इसमें सात कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। इनमें मधुबन मिश्रा, कमरूल इस्लाम, प्रीति तोमर, ऋषभ कुमार, शुभम सिंह, रतना यादव और चपरासी दिनेश कुशवाहा शामिल हैं। जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी का एक दिन का वेतन काटने के आदेश दिए। साथ ही चेतावनी दी कि अगर दोबारा ऐसा हुआ तो और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

रिश्वतखोरी का भंडाफोड़, मोबाइल पर खुली पोल

निरीक्षण के दौरान डीएम ने मौके पर ही एक आवेदक अरविंद गौड़ से मोबाइल पर बात की। गौड़ ने खुलासा किया कि ई-रिक्शा की डुप्लीकेट आरसी दिलाने के लिए उससे 2000 रुपये वसूले गए, जबकि तय शुल्क सिर्फ 500 रुपये है। डीएम ने तुरंत संबंधित प्राइवेट व्यक्ति का नंबर लिया और उससे बात की। पहले तो उसने इनकार किया, लेकिन डीएम की सख्ती के आगे सच उगल दिया और रकम लेने की बात मान ली। इस पर जिलाधिकारी ने डीटीसी को मामले की विस्तृत जांच कर दोषी पर कार्रवाई करने के आदेश दिए।

300 से ज्यादा लोग होते हैं परेशान

निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि सोमवार को ही लगभग 300 लोग स्थायी लाइसेंस और नवीनीकरण के कार्यों के लिए आरटीओ पहुंचे थे, लेकिन कई मामलों का निस्तारण लंबित पड़ा रहा। डीएम ने नाराज़गी जताते हुए निर्देश दिया कि सभी लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण हर हाल में होना चाहिए।

साफ-सफाई और निगरानी के निर्देश

निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी ने अपर नगर मजिस्ट्रेट-6 आलोक गुप्ता को आरटीओ कार्यालय की कार्यप्रणाली की नियमित निगरानी करने और विस्तृत रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी सौंपी। साथ ही एआरटीओ (प्रशासन) आलोक कुमार को परिसर में स्वच्छता व्यवस्था दुरुस्त करने का सख्त आदेश दिया।

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