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पूर्व बार एसोसिएशन महामंत्री की हिरासत पर बवाल

राजा राम हत्याकांड की विवेचना को लेकर पुलिस–अधिवक्ता आमने-सामने

नवाबगंज थाने का घेराव, कचहरी में पुलिस की नो-एंट्री का ऐलान

स्वतंत्र हित / संवाददाता

कानपुर।

कानपुर के बहुचर्चित राजा राम हत्याकांड की दोबारा शुरू हुई विवेचना अब कानून-व्यवस्था का मामला बनती जा रही है। शनिवार को पूछताछ के नाम पर बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री अधिवक्ता राकेश तिवारी को पुलिस द्वारा थाने लाए जाने के बाद अधिवक्ता समाज आक्रोशित हो उठा और मामला खुले टकराव में बदल गया।

जानकारी मिलते ही सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ता नवाबगंज थाना पहुंच गए और थाने को चारों ओर से घेर लिया। कुछ ही देर में थाना परिसर नारेबाज़ी और विरोध प्रदर्शन का केंद्र बन गया।

“कानून हम भी जानते हैं” के नारों से गूंजा थाना

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने पुलिस प्रशासन पर मनमानी और दमनकारी रवैये का आरोप लगाते हुए

“कचहरी हमारी है”, “कानून हम भी जानते है।

अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि—

अब किसी भी सूरत में कचहरी परिसर में पुलिस को प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।

JCP का पक्ष: पूछताछ के लिए बुलाया गया, गिरफ्तारी नहीं

संयुक्त पुलिस आयुक्त (मुख्यालय/अपराध) विनोद कुमार सिंह ने बताया कि—

राजा राम हत्याकांड वर्ष 2021 में एनआरआई सिटी क्षेत्र में हुआ था।

मामले में पहले ही केस दर्ज कर आरोपियों को जेल भेजा गया था और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।

इसके बाद मृतक के बेटे ने विवेचना से असहमति जताते हुए

करीब दो-तीन महीने पहले दोबारा प्रार्थना पत्र देकर शिकायत की थी कि

मुख्य आरोपियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

अदालती आदेश के बाद विवेचना दोबारा शुरू की गई,

जिसके दौरान कुछ नए नाम सामने आए,

जिनमें अधिवक्ता राकेश तिवारी और एनआरआई सिटी से जुड़े दो कारोबारी शामिल हैं।

JCP के अनुसार—

किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है

केवल पूछताछ की जा रही है

यह विवेचना की सामान्य प्रक्रिया है

अधिवक्ताओं का आरोप: दुर्भावना से फंसाने की कोशिश

विरोध कर रहे अधिवक्ताओं का कहना है कि—

अधिवक्ता राकेश तिवारी का हत्या से कोई सीधा संबंध नहीं है

पुलिस जानबूझकर अधिवक्ता समाज को निशाना बना रही है

यह कार्रवाई डराने और दबाने की कोशिश है

वकीलों ने इसे न्यायिक स्वतंत्रता और अधिवक्ताओं की गरिमा पर हमला बताया।

अनुराग पाण्डेय को थाने में प्रवेश से रोके जाने पर बढ़ा आक्रोश

स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब

अधिवक्ता अनुराग पाण्डेय को नवाबगंज थाने में प्रवेश से पुलिस ने रोक दिया।

इस घटना के बाद प्रदर्शन और उग्र हो गया और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

“साक्ष्यों का काउंटर करें, दूध का दूध-पानी का पानी हो जाएगा”

अधिवक्ताओं का कहना है कि—

यदि पुलिस के पास साक्ष्य हैं तो वे उन्हें सामने लाए,

उनका कानूनी काउंटर किया जाएगा।

स्पष्ट किया गया कि—

यदि साक्ष्य टिकाऊ नहीं पाए गए तो संबंधित लोगों को छोड़ा जाए

और यदि दोष सिद्ध हुआ तो आगे की कार्रवाई हो

बताया गया कि इस मामले में शूटरों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

प्रशासन में हड़कंप, बढ़ाई गई सुरक्षा

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए

नवाबगंज थाने के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

देर शाम तक अधिवक्ता थाने पर डटे रहे और

पूर्व महामंत्री राकेश तिवारी को तत्काल छोड़े जाने की मांग करते रहे।

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