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ग्राम जाफरपुर अग्निकांड: सिलेंडर लीकेज से पिता–पुत्री की मौत, मामला मानवाधिकार आयोग पहुँचा

अनुच्छेद 21 के उल्लंघन का आरोप, ₹10 लाख मुआवज़े और मजिस्ट्रियल जाँच की माँग

स्वतंत्र हित संवाददाता अंजनी बाजपेई 

बिजनौर/लखनऊ।

जनपद बिजनौर के थाना चाँदपुर क्षेत्र स्थित ग्राम जाफरपुर में रसोई गैस सिलेंडर के कथित लीकेज से हुए भीषण अग्निकांड में पिता–पुत्री की मौत का मामला अब मानवाधिकार के प्रश्न के रूप में सामने आया है। इस दर्दनाक घटना को जीवन और गरिमा के अधिकार का गंभीर उल्लंघन बताते हुए शिकायत उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग में दर्ज कराई गई है।

15 फरवरी की घटना: आग की लपटों में उजड़ा परिवार

प्राप्त जानकारी के अनुसार 15 फरवरी 2026 को घर में रखे एलपीजी सिलेंडर में कथित रिसाव के कारण अचानक आग भड़क उठी। हादसे में 42 वर्षीय अमित और उनकी लगभग 5 वर्षीय पुत्री डोली गंभीर रूप से झुलस गए। परिजन और स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को अस्पताल पहुँचाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतक परिवार दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर था और अब आश्रितों के सामने आजीविका, बच्चों की शिक्षा तथा पुनर्वास का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. तारिक़ ज़की ने उठाया मामला

वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट के राष्ट्रीय जनरल सेक्रेटरी डॉ. तारिक़ ज़की ने इस प्रकरण को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त जीवन एवं गरिमा के अधिकार का उल्लंघन बताया है।

उन्होंने आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि एलपीजी गैस जैसे अत्यंत ज्वलनशील पदार्थ के वितरण में “Highest Degree of Care” (सर्वोच्च स्तर की सावधानी) का सिद्धांत लागू होता है। यदि सिलेंडर, वाल्व, रेगुलेटर या सुरक्षा परीक्षण में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित गैस एजेंसी और आपूर्तिकर्ता कंपनी संयुक्त रूप से उत्तरदायी होंगी।

आयोग ने मामले को डायरी संख्या 1351/IN/2026 के अंतर्गत पंजीकृत कर लिया है।

आयोग से की गई प्रमुख माँगें

डॉ. ज़की ने आयोग के समक्ष निम्न माँगें रखी हैं—

₹10,00,000 (दस लाख रुपये) का प्रतिकर (मुआवज़ा)

न्यायिक/मजिस्ट्रियल जाँच के आदेश

सिलेंडर व रेगुलेटर की फॉरेंसिक जाँच

दोषी अधिकारियों एवं गैस वितरण एजेंसी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई

सुरक्षा मानकों और जवाबदेही पर उठे सवाल

यह घटना गैस सुरक्षा मानकों, वितरण एजेंसियों की जवाबदेही और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडर की नियमित जाँच, उपभोक्ताओं को सुरक्षा संबंधी जागरूकता और आपूर्ति तंत्र की पारदर्शिता को लेकर भी बहस तेज हो गई है।

अब सबकी निगाहें उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं कि पीड़ित परिवार को न्याय और आर्थिक सहायता कब तक मिलती है, तथा जिम्मेदार पक्षों पर क्या कार्रवाई होती है।

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