Breaking News
April 20, 2026 8:30 pm
News
कानपुर में ‘न्याय बंद, अत्याचार चालू’…?नशे में धुत चालक की रफ्तार का कहर:जाम और अतिक्रमण की शिकायत पर एसडीएम ने किया निरीक्षणकानपुर सेंट्रल स्टेशन की लिफ्ट में फंसे 18 यात्री, दरवाजा तोड़कर बाहर निकाला गयाघरेलू गैस सिलेंडरों की पर्याप्त आपूर्ति, उपभोक्ता न हों परेशान: डीएसओमहाराजपुर में कांग्रेस की पदयात्रा से बढ़ी चुनावी सरगर्मीकंज के पेड़ पर 15 वर्षीय बालक ने फांसी लगाकर की आत्महत्यानवाबगंज पुलिस से मुठभेड़ में दो शातिर लुटेरे गिरफ्तार, दोनों के पैरों में लगी गोलीयुद्ध के बीच शालीनता से मनाएं होली : अखिलेश यादव एलडीए कॉलोनी में जन्मदिन की पार्टी बनी मातम,खेल बना जानलेवा, 13 वर्षीय नाबालिक ढेर।

महाकुंभ के तपस्वी नगर में पंच धूनी तपस्या का आरंभ

मनोज पांडेय

महाकुंभनगर। महाकुंभ त्याग और तपस्या के साथ विभिन्न साधनाओं के संकल्प का भी पर्व है। प्रयागराज महाकुंभ साधनाओं के विविध संकल्पों का साक्षी बन रहा है ऐसी ही एक साधना है पंच धूनी तपस्या जिसे अग्नि स्नान की साधना भी कहा जाता है जिसकी शुरुआत बसंत पंचमी के अमृत स्नान पर्व से हो गई। कुम्भ क्षेत्र जप, तप और साधना का क्षेत्र है जिसके हर कोने में कोई न कोई साधक अपनी साधना में रत नज़र आएगा। महाकुम्भ के तपस्वी नगर में बसंत पंचमी से एक खास तरह की साधना का आरंभ हुआ है जिसे लेकर श्रद्धालुओं में खासा कौतूहल है। इस साधना को पंच धूनी तपस्या कहा जाता है। आम भक्त अग्नि स्नान साधना के नाम से भी जानते हैं। इस साधना में साधक अपने चारों तरफ जलती आग के कई घेरे बनाकर उसके बीच में बैठकर अपनी साधना करता है।वैष्णव अखाड़े के खालसा में इस अग्नि स्नान की साधना की परम्परा है जो बेहद त्याग और संयम की स्थिति में पहुंचने के बाद की जाती है। दिगंबर अनी अखाड़े में महंत राघव दास बताते हैं कि अग्नि साधना वैष्णव अखाड़ों के सिरमौर अखाड़े दिगंबर अनी अखाड़े के अखिल भारतीय पंच तेरह भाई त्यागी खालसा के साधकों की विशेष साधना है। यह साधना अठारह वर्षो की होती है। इस अनुष्ठान को पूरा करने के पीछे न सिर्फ साधना के उद्देश्य की पूर्ति करनी होती है बल्कि साधु की क्षमता और सहनशीलता का परीक्षण भी होता है। लगातार 18 वर्ष तक साल के 5 माह इस कठोर तप से गुजरने के बाद उस साधु को वैरागी की उपाधि मिलती है।

दिगंबर अखाड़े के सीताराम दास का कहना है सभी छह श्रेणी में तपस्या की अलग-अलग रीति होती है। सबसे प्रारंभिक पंच श्रेणी होती है। साधुओं के दीक्षा लेने के बाद उनकी यह शुरुआती तपस्या होती है। इसमें साधक पांच स्थान पर आग जलाकर उसकी आंच के बीच बैठकर तपस्या करते हैं। दूसरी श्रेणी में सात जगह पर आग जलाकर उसके बीच बैठकर तपस्या करनी होती है। इसी तरह द्वादश श्रेणी में 12 स्थान, 84 श्रेणी में 84 स्थान एवं कोटि श्रेणी में सैकड़ों स्थान पर जल रही अग्नि की आंच के बीच बैठकर तपस्या करनी होती है। खप्पर श्रेणी की तपस्या सबसे कठिन होती है। परमात्मा दास के मुताबिक सिर के ऊपर मटके में रखकर अग्नि प्रज्वलित की जाती है। इसकी आंच के मध्य में साधक को रोजाना 6 से 16 घंटे तक तपस्या करनी होती है। बसंत पंचमी से शुरू होकर गंगा दशहरा तक यह चलती है। तीन साल तक यह क्रम चलता है।

  • Related Posts

    कानपुर में ‘न्याय बंद, अत्याचार चालू’…?

    मानवाधिकार लड़ाई को नई धार, “वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स” के तहत डॉ. तारिक ज़की की पहल सुर्खियों में दहेज, दुष्कर्म प्रयास जैसे गंभीर आरोपों में FIR नहीं — पीड़िता…

    नशे में धुत चालक की रफ्तार का कहर:

    एआरटीओ के घर में घुसी स्कॉर्पियो, गार्ड बाल-बाल बचा, CCTV वायरल स्वतंत्र हित/रजत शर्मा  कानपुर। के रावतपुर थाना क्षेत्र स्थित विकास नगर में देर रात नशे में तेज रफ्तार वाहन…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *