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पूर्व सैनिक कर्मचारियों की समस्याओं पर मंथन, इंडियन बैंक पर मनमानी का आरोप

स्वतंत्र हित/ संवाददाता 

कानपुर। इंडियन बैंक उत्तर प्रदेश में कार्यरत पूर्व सैनिक कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर शनिवार को बर्रा स्थित संकट मोचन धाम (बारातशाला) में एक महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन भूतपूर्व सैनिक कर्मचारी कल्याण सेवा समिति, कानपुर द्वारा किया गया, जिसमें प्रदेश भर के विभिन्न अंचलों से पूर्व सैनिक कर्मचारियों ने भाग लिया।

सम्मेलन में इंडियन बैंक के तीन फील्ड जनरल मैनेजर कार्यालयों के अंतर्गत आने वाले सभी 14 अंचलों में कार्यरत पूर्व सैनिक कर्मचारियों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बैंक प्रबंधन पूर्व सैनिक कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाए हुए है।

पूर्व सैनिक कर्मचारियों ने बताया कि शाखा प्रबंधन अक्सर मौखिक आदेशों पर एक शाखा से दूसरी शाखा में कार्य करने को भेज देता है, जबकि कोई लिखित आदेश नहीं दिया जाता। ऐसे में यदि कर्मचारी के साथ मार्ग दुर्घटना जैसी कोई घटना हो जाती है, तो बैंक जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है।

सम्मेलन में यह भी आरोप लगाया गया कि बैंक द्वारा वेतन की वसूली मनमाने ढंग से की जा रही है, जो डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज की 01 जनवरी 2006 और 2014 की गाइडलाइन के विपरीत है। वक्ताओं ने कहा कि यह वसूली प्रक्रिया माननीय उच्चतम न्यायालय के 18 दिसंबर 2014 के निर्णय तथा पंजाब नेशनल बैंक के 30 जुलाई 2025 के फैसले का भी उल्लंघन है।

सभा की अध्यक्षता कर रहे तुलसीराम ने कहा कि इंडियन बैंक द्वारा पूर्व सैनिक कर्मचारियों से की जा रही वेतन वसूली न केवल असंवैधानिक है, बल्कि अमानवीय भी है। समिति के संयोजक के.एन. शुक्ला ने इस मुद्दे पर एकजुट होकर आंदोलन की चेतावनी दी।

सम्मेलन में आयुषराज सिंह, रविन्द्र शुक्ला, सलीम अहमद, संजय शर्मा, आशीष मिश्रा, बीएनएस गुप्ता, नीरज, शीला दुबे, नरेंद्र निषाद, अनुराग पाण्डेय, राजेश शुक्ला, केके वर्मा, अश्वनी कुमार, दीपक दीक्षित सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

सभा के अंत में समिति ने मांग की कि इंडियन बैंक पूर्व सैनिक कर्मचारियों की समस्याओं का शीघ्र समाधान करे, अन्यथा आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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