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जिलाधिकारी ने ऋण योजनाओं की समीक्षा बैठक की

जिलाधिकारी ने सभी बैंकों को दिए सख्त निर्देश

अंजनी बाजपेई 

कानपुर।जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में आज सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में जिला स्तरीय समीक्षा समिति एवं जिला सलाहकार समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में वार्षिक ऋण योजना, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, एक जनपद एक उत्पाद योजना, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग योजना तथा प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।

जिलाधिकारी ने शिक्षा ऋण आवेदनों के लंबित रहने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की और स्पष्ट निर्देश दिए कि ऐसे प्रकरणों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि मानवता के दृष्टिकोण से छात्रों को शीघ्र राहत मिलनी चाहिए। अतः शिक्षा ऋण से जुड़े सभी मामलों को प्राथमिकता देते हुए त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने उद्यमियों से संबंधित ऋण आवेदनों पर भी विशेष बल देते हुए कहा कि बैंकों को पारदर्शी ढंग से कार्य करना चाहिए और आवेदकों की सहायता करनी चाहिए। अधूरे दस्तावेजों की स्थिति में आवेदकों को स्पष्ट रूप से अवगत कराते हुए शीघ्र निस्तारण कराना बैंक की जिम्मेदारी है।

बैठक में यह तथ्य सामने आया कि जून माह से अब तक जिला सहकारी बैंक, यूको बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, आईडीबीआई बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का ऋण-जमा अनुपात भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित न्यूनतम 40 प्रतिशत से नीचे चला गया है। इस पर जिलाधिकारी ने गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए बैंक अधिकारियों को फटकार लगाई और चेतावनी दी कि निर्धारित मानकों का पालन न करने की स्थिति में कठोर कार्यवाही की जाएगी।

उन्होंने लीड बैंक मैनेजर को निर्देशित किया कि मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के अंतर्गत लंबित आवेदनों की बैंक-वार समीक्षा नियमित रूप से की जाए और 20 सितम्बर को विशेष बैठक आयोजित कर सभी लंबित प्रकरणों का निस्तारण कराया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि योजनाओं की प्रगति संबंधी जानकारी दो दिनों में मुख्य विकास अधिकारी को उपलब्ध कराई जाए और प्रत्येक सप्ताह प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद के औद्योगिक विकास को गति देने के लिए उद्यमियों को अधिक से अधिक ऋण उपलब्ध कराया जाए और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन की मंशा के अनुरूप योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना ही प्रशासन की प्राथमिकता है, जिसके लिए बैंकिंग प्रणाली सक्रिय, पारदर्शी और संवेदनशील बने।

बैठक में एलडीओ, नाबार्ड के डीडीएम, एलडीएम, विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी एवं सभी बैंकों के जिला समन्वयक उपस्थित रहे।

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