पीडब्ल्यूडी, नगर निगम और जल संस्थान की कथित लापरवाही पर उठे सवाल
बारिश के पांच घंटे बाद भी सड़कें बनीं नाला
स्वतंत्र हित / सुशील निगम
कानपुर दक्षिण। कानपुर को हाईटेक और मॉडल सिटी बनाने के सरकारी दावों के बीच शहर की जमीनी तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। पीडब्ल्यूडी, नगर निगम और जल संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि विकास के नाम पर सड़कें बन तो रही हैं, लेकिन जलभराव, टूटे मैनहोल और गड्ढों से आम जनता की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती जा रही हैं।
बुधवार सुबह हुई तेज बारिश के करीब पांच घंटे बाद स्वतंत्र हित टीम ने किदवई नगर चौराहे से यशोदा नगर बाईपास तक मौके का जायजा लिया। चालीस दुकान चौराहे के आसपास का नजारा देखकर ऐसा लगा मानो सड़क नहीं, किसी नाले का विस्तार हो। बीच चौराहे पर महीनों से टूटे पड़े मैनहोल के ढक्कन से नाले का पानी उफनता दिखाई दिया। बारिश का पानी और नाले का गंदा पानी सड़क किनारे स्थित दुकानों तक पहुंच गया। दुकानदारों को अपने प्रतिष्ठानों के सामने जमा गंदे पानी के बीच दिन गुजारने को मजबूर होना पड़ा और खुद ही सफाई कर्मी बन वाइपर से उफ़नाये नाले का पानी निकलते नजर आए।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कोई पहली बार की स्थिति नहीं है। बारिश होते ही क्षेत्र में जलभराव और गंदगी का संकट खड़ा हो जाता है। कई बार शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से लोगों में नाराजगी है।
मैनहोल का ढक्कन टूटा, जिम्मेदारी किसकी?
सबसे बड़ा सवाल उस टूटे मैनहोल को लेकर है, जो लंबे समय से हादसे को न्योता देता नजर आ रहा है। सवाल यह भी है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदार विभागों की नींद खुलेगी? यदि मैनहोल की स्थिति पहले से विभागों के संज्ञान में है तो अब तक उसे ठीक क्यों नहीं कराया गया—यह सवाल क्षेत्रीय लोगों की जुबान पर है।
सड़क कम, गड्ढे ज्यादा!
किदवई नगर से यशोदा नगर बाईपास तक सड़क की हालत भी सवालों के घेरे में है। जगह-जगह गड्ढे और उखड़ी सड़क राहगीरों तथा वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। स्थानीय लोगों का व्यंग्य है कि सड़क में डामर की जगह मानो गिट्टियों को किसी तरह चिपकाकर काम चला दिया गया हो।
बारिश के बाद इन गड्ढों में पानी भरने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से जोखिम भरी बनी हुई है।
हाईटेक सिटी के दावों पर जमी जमीनी हकीकत की कीचड़
एक तरफ शहर को हाईटेक मॉडल के रूप में विकसित करने की बातें हो रही हैं, दूसरी तरफ सड़क पर टूटे मैनहोल, जलभराव और गड्ढे विकास की तस्वीर पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।
क्या यही है कि कानपुर को हाईटेक बनाने की रफ्तार शायद इतनी तेज है कि नाले और गड्ढे भी विकास की दौड़ में सड़क से आगे निकल गए हैं।
अब सवाल यह है कि आखिर कब तक कानपुर की जनता ऐसी दुर्दशा झेलती रहेगी? कब तक बारिश के बाद लोगों को सड़क की जगह नालों से होकर गुजरना पड़ेगा? कब तक वाहन चालक गड्ढों से बचते-बचाते अपने वाहन चलाते रहेंगे? और कब तक किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा?
जनता को आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान चाहिए।
नगर निगम, जल संस्थान और पीडब्ल्यूडी के जिम्मेदार अधिकारियों से क्षेत्रीय लोगों ने मांग की है कि मौके का स्थलीय निरीक्षण कर टूटे मैनहोल, जलभराव और जर्जर सड़क की समस्या का तत्काल समाधान कराया जाए, ताकि बारिश आते ही पूरा इलाका नर्क में तब्दील न हो।


