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फर्जी जीएसटी फर्म बनाकर 2.29 करोड़ की कर चोरी का भंडाफोड़, 4 आरोपी गिरफ्तार

गरीबों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर 2.29 करोड़ की अवैध आईटीसी लेने का खुलासा

गोपाल द्विवेदी

औरैया। पुलिस ने फर्जी जीएसटी फर्म बनाकर करोड़ों रुपये की कर चोरी करने वाले एक संगठित गिरोह का खुलासा करते हुए चार अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अभिषेक भारती के नेतृत्व में की गई। मंगलवार दोपहर आयोजित प्रेस वार्ता में पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गिरोह ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे कई बोगस फर्मों का जीएसटी पंजीकरण कराया और बिना किसी वास्तविक खरीद-बिक्री के फर्जी इनवॉयस जारी कर 229.50 लाख रुपये की अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा किया। इससे केंद्र और राज्य सरकार के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को 10 से 15 हजार रुपये का लालच देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाते और अन्य दस्तावेज प्राप्त करते थे। इन दस्तावेजों के आधार पर फर्जी किरायानामा और बिजली के बिल तैयार कर जीएसटी फर्मों का पंजीकरण कराया जाता था। इसके बाद इन बोगस फर्मों के माध्यम से आईटीसी क्लेम कर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की चपत लगाई गई। पुलिस ने इस मामले में श्याम सुंदर पासवान, अशोक कुमार पासवान, महावीर शरण उर्फ पहाड़िया और विमल कुमार को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 2 लैपटॉप, 8 एंड्रॉइड मोबाइल फोन, 9 कीपैड फोन, 8 पासबुक, 7 डेबिट कार्ड, 11 रजिस्टर, 12 आधार कार्ड, 20 सिम कार्ड और 6,000 रुपये नकद बरामद किए गए हैं। जांच के अनुसार श्याम सुंदर पासवान भोले-भाले लोगों से दस्तावेज एकत्र कर फर्जी फर्म बनवाता था। अशोक कुमार कंप्यूटर के माध्यम से दस्तावेजों में हेरफेर कर फर्जी कंपनियां तैयार करता था। महावीर शरण बोगस फर्मों के जरिए आईटीसी पास-ऑन कर राजस्व चोरी में शामिल था, जबकि विमल कुमार ने अपने नाम पर फर्जी फर्म बनवाकर कमीशन और आर्थिक लाभ प्राप्त किया। इस पूरे मामले की जांच विशेष एसआईटी द्वारा की गई, जिसमें प्रभारी निरीक्षक राजीव कुमार, अपराध शाखा प्रभारी निरीक्षक भूपेंद्र सिंह, निरीक्षक अनूप कुमार मौर्य तथा साइबर थाना के उपनिरीक्षक हेमंत चौधरी शामिल रहे। पुलिस ने बताया कि मामले की आगे भी जांच जारी है और अन्य संलिप्त लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

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