- महापौर पर लगाए गंभीर आरोप
- स्वतंत्र हित /विपिन सागर
कानपुर, नगर निगम में विकास कार्यों को लेकर विवाद गहरा गया है। वार्ड में काम नहीं होने से नाराज भाजपा पार्षद पवन गुप्ता ने नगर निगम के प्रशासनिक भवन के गेट पर छुरी से अपनी नस काटने का प्रयास किया। मौके पर मौजूद भाजपा पार्षद विकास जायसवाल ने उन्हें रोक लिया। घटना से परिसर में हड़कंप मच गया।
पवन गुप्ता ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए महापौर प्रमिला पांडे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उनका कहना है कि विकास कार्यों की फाइलें आगे नहीं बढ़ाई जा रही हैं, जिससे जनता से किए वादे पूरे करना मुश्किल हो रहा है।
विकास कार्यों की फाइलें अटकने से नाराजगी
पवन गुप्ता का आरोप है कि नगर निगम के कई अधिकारी महापौर के बेटे बंटी पांडे के कथित प्रभाव में काम करते हैं। उनके मुताबिक, उनके वार्ड में विकास प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिल रही है। उन्होंने दावा किया कि नगर आयुक्त के निर्देशों के बावजूद कार्यों में तेजी नहीं आ रही।
पार्षद ने कहा कि जनता ने उन्हें प्रतिनिधि चुना है और क्षेत्र की समस्याओं का समाधान कराना उनकी जिम्मेदारी है। इसी नाराजगी में उन्होंने खुद को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया।
पार्षद विकास जायसवाल ने उनके हाथ से छुरी छीनकर उन्हें रोक लिया। इसके बाद पवन गुप्ता ने चेतावनी दी कि यदि बाधा डालने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई और उनका तबादला नहीं किया गया, तो वह दोबारा आत्मघाती कदम उठाएंगे। उन्होंने आत्मदाह की भी चेतावनी दी।
महापौर के खिलाफ कई महीनों से विरोध
महापौर प्रमिला पांडे के खिलाफ भाजपा के छह असंतुष्ट पार्षद पिछले कई महीनों से विरोध जता रहे हैं। उनका आरोप है कि नगर निगम में विकास कार्यों और बजट आवंटन में पक्षपात किया जा रहा है।
बागी पार्षदों का दावा है कि महापौर के करीबी पार्षदों के वार्डों में करोड़ों रुपये के विकास कार्य स्वीकृत होते हैं, जबकि विरोध करने वालों की फाइलें आगे नहीं बढ़तीं। उनका यह भी आरोप है कि नगर निगम के कामकाज में बंटी पांडे का हस्तक्षेप रहता है।
पार्षदों के मुताबिक, वे क्षेत्रीय और प्रदेश स्तर के भाजपा पदाधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन तक भी मामला पहुंचाने का दावा किया है।
नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
पवन गुप्ता ने पहले भी नगर निगम में कथित भ्रष्टाचार और विकास कार्यों में बाधा के आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि काम कराने के लिए कथित तौर पर अनुचित भुगतान का दबाव बनाया जाता है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
घटना के बाद नगर निगम में विकास कार्यों की मंजूरी, अधिकारियों की जवाबदेही और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों के निस्तारण पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन और भाजपा संगठन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।


