आरसीसी सड़क का काम अधूरा, करीब 100 मीटर रास्ता अब भी कच्चा; ग्रामीणों ने ठेकेदारों पर लगाए घोटाले के आरोप
स्वतंत्र हित /सत्य पाल सिंह
लखनऊ काकोरी / विकासखंड की ग्राम सभा दसदोई के पठान खेड़ा में विकास कार्य को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि काकोरी-बहरू संपर्क मार्ग से पठान खेड़ा मुख्य मार्ग होते हुए प्रभु दयाल के घर तक आरसीसी सड़क निर्माण के लिए बजट स्वीकृत हुआ था, लेकिन मौके पर सड़क का निर्माण अधूरा पड़ा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में लगाए गए ठेकेदारों द्वारा काम में अनियमितता बरती गई और सरकारी धन के दुरुपयोग/घोटाले की आशंका है। ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराकर स्वीकृत बजट और खर्च की गई धनराशि का सत्यापन कराने की मांग की है।
ग्रामीणों के मुताबिक सड़क का निर्माण मुनीलाल के घर तक ही कराया गया है, जबकि इसके आगे करीब 100 मीटर रास्ता अब भी कच्चा पड़ा है।
शिलापट्ट पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के नाम
मौके पर लगे शिलापट्ट पर पूर्व सांसद कौशल किशोर, विधायक जय देवी कौशल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य लालू यादव और ब्लॉक प्रमुख नीतू सिंह यादव समेत अन्य जनप्रतिनिधियों के नाम दर्ज हैं। शिलापट्ट पर खंड विकास अधिकारी रीता सिंह और अवर अभियंता रविंद्र कुमार यादव का नाम भी दर्ज है।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब सड़क का निर्माण अभी अधूरा है तो कार्य की स्थिति और शिलापट्ट को लेकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की गई।
ग्रामीणों ने ठेकेदारों पर लगाए गंभीर आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान जिम्मेदार ठेकेदारों ने निर्माण कार्य में कथित तौर पर अनियमितता बरती। उनका कहना है कि यदि स्वीकृत बजट से पूरा कार्य कराया जाना था तो मौके पर करीब 100 मीटर रास्ता कच्चा क्यों छोड़ दिया गया। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की तकनीकी जांच, इस्तेमाल हुई सामग्री की गुणवत्ता की जांच और स्वीकृत बजट के सापेक्ष खर्च की गई धनराशि का ऑडिट कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने की जांच की मांग
मामले की शिकायत करने वाले ग्रामीणों में पूर्व प्रधान अयोध्या प्रसाद, रामाश्रय पाल, गुड्डू पाल, सत्रोहन पाल, राजकुमार, रंजन लाल, राम नरेश और संजय समेत गांव की दर्जनों महिलाएं शामिल रहीं।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण से जुड़े अभिलेखों, भुगतान और मौके पर हुए कार्य का मिलान कराया जाए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कितना बजट स्वीकृत हुआ, कितना खर्च हुआ और धरातल पर कितना काम हुआ।
अधिकारियों पक्ष
काकोरी विकासखंड पहुंचकर मामले की जानकारी लेने पर खंड विकास अधिकारी श्वेता ने बताया कि उनकी इस क्षेत्र में हाल ही में नियुक्ति हुई है, इसलिए उन्हें इस प्रकरण की संपूर्ण जानकारी नहीं है।
अब बड़ा सवाल यह है कि यदि बजट में पूरा कार्य कराना संभव नहीं था तो निर्माण की स्वीकृति, भुगतान और शिलापट्ट में दर्ज कार्य की स्थिति क्या है? ग्रामीणों द्वारा लगाए गए ठेकेदारों पर कथित घोटाले के आरोपों की जांच कब होगी? निष्पक्ष जांच के बाद ही सड़क निर्माण में हुई वास्तविक प्रगति और सरकारी धन के इस्तेमाल की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


