आगजनी कांड से बेल तक का सफर
अखिलेश शुक्ला/स्वतंत्र हित
कानपुर। बहुचर्चित जाजमऊ आगजनी कांड में जेल की सलाखों के पीछे बंद समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी को आखिरकार राहत मिल गई है। प्रयागराज हाईकोर्ट ने गुरुवार को लंबी सुनवाई के बाद उन्हें ज़मानत दे दी। आदेश के मुताबिक, तीन दिन के भीतर ज़मानत की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सोलंकी जेल से बाहर आ जाएंगे।
आगजनी कांड: कैसे शुरू हुआ विवाद?
नवंबर 2022 में कानपुर के जाजमऊ इलाके में एक महिला के प्लॉट को लेकर विवाद खड़ा हुआ। आरोप है कि कब्जे की नीयत से प्लॉट पर आगजनी की गई। मामले में पूर्व विधायक इरफान सोलंकी और उनके सहयोगियों का नाम सामने आया।
गिरफ्तारी और जेल का सफर
दिसंबर 2022 : पीड़ित महिला की तहरीर पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।
जनवरी 2023 : सोलंकी को हिरासत में लेकर जेल भेजा गया।
2023-24 : निचली अदालत में कई बार जमानत याचिका दायर हुई, लेकिन हर बार खारिज कर दी गई।
सितंबर 2025 : हाईकोर्ट ने जमानत मंजूर कर दी।
कोर्ट में लंबी बहस
हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने लंबी दलीलें दीं। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मामले में सोलंकी को राजनीतिक कारणों से फंसाया गया है, जबकि अभियोजन पक्ष ने गंभीर आरोपों का हवाला दिया। अंततः कोर्ट ने सभी पहलुओं पर विचार कर जमानत मंजूर कर ली।
परिवार और समर्थकों में उत्साह
जमानत आदेश की खबर मिलते ही सोलंकी के परिवार और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। कई समर्थक जेल से उनकी रिहाई का इंतजार कर रहे हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सोलंकी की वापसी से सपा कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ेगा और कानपुर की सियासत में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।
सियासत में गरमी
इरफान सोलंकी की रिहाई को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह मामला न सिर्फ कानपुर बल्कि प्रदेश की राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है।


