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सुप्रीम कोर्ट से कुलदीप सेंगर को झटका, कस्टोडियल डेथ मामले में नहीं मिली जमानत

CJI बोले- दिल्ली हाईकोर्ट 3 महीने में पूरी करे सुनवाई; दोषी ने दी थी 9 साल जेल में रहने की दलील

स्वतंत्र हित/अंजनी बाजपेई 

उन्नाव। रेप पीड़िता के पिता की कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने सेंगर की जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए मामला दिल्ली हाईकोर्ट के पाले में डाल दिया है।

सीजेआई (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि जमानत और अपील पर अंतिम फैसला दिल्ली हाईकोर्ट ही करेगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि वह सेंगर की अपील पर सुनवाई तीन महीने के भीतर अनिवार्य रूप से पूरी करे।

‘परिवार के इकलौते कमाने वाले की मौत, नरमी नहीं दिखा सकते’

सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष के वकील महमूद प्राचा ने जमानत का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि अगर सेंगर बाहर आता है, तो पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने भी 19 जनवरी को जमानत याचिका खारिज करते हुए सख्त टिप्पणी की थी कि जिस मामले में परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य की हिरासत में मौत हुई हो, वहां कोई रियायत नहीं दी जा सकती।

सेंगर की दलील: ‘केवल 11 महीने की सजा बाकी’

कुलदीप सिंह सेंगर की ओर से कोर्ट में तर्क दिया गया कि वह इस केस के संबंध में लगभग 9 साल जेल में काट चुका है और उसकी सजा के अब केवल 11 महीने ही शेष बचे हैं। इसी आधार पर उसने अंतरिम राहत की मांग की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया।

क्या था पूरा मामला? (तारीख-दर-तारीख)

30 अक्टूबर 2017: विधायक की ओर से पीड़िता के परिवार पर मानहानि का मुकदमा दर्ज हुआ।

3 अप्रैल 2018: विधायक के भाई अतुल सिंह ने साथियों के साथ मिलकर पीड़िता के पिता को बेरहमी से पीटा।

4 अप्रैल 2018: पुलिस ने घायल पिता पर ही केस दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया।

9 अप्रैल 2018: जेल में इलाज के दौरान पीड़िता के पिता ने दम तोड़ दिया। आरोप लगा कि सेंगर के दबाव में यह ‘कस्टोडियल डेथ’ की साजिश थी।

वर्तमान स्थिति: कुलदीप सेंगर फिलहाल रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहा है, जबकि पिता की मौत के मामले में ट्रायल कोर्ट ने उसे 10 साल की जेल और 10 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

 

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