अंजनी बाजपेई/स्वतंत्र हित
लखनऊ। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज की स्थापना के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस क्षण को “युगांतकारी” बताते हुए कहा कि 500 वर्षों के संकल्प की सिद्धि के साथ आज सदियों के घाव भर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और आत्मसम्मान का पुनर्जागरण है।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत “सियावर रामचंद्र की जय” के जयघोष से की। उन्होंने कहा कि राम मंदिर पर ध्वजा की प्रतिष्ठा उस पाँच शताब्दियों पुराने तप, त्याग और संघर्ष की पूर्णाहुति है, जिसकी अग्नि कभी बुझी नहीं। प्रधानमंत्री के अनुसार पूरा विश्व आज राममय हो उठा है और यह क्षण भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास को नई दिशा देने वाला है।
उन्होंने कहा कि कोविदार वृक्ष और स्थापित धर्मध्वज भारत की अस्मिता, मर्यादा और संस्कृति की पुनर्स्थापना का प्रतीक हैं। पीएम मोदी ने इस अवसर पर आने वाले दस वर्षों के लिए संकल्प दोहराते हुए कहा कि देश को पूरी तरह “मैकाले की मानसिकता” से मुक्त करना होगा, क्योंकि राजनीतिक स्वतंत्रता के बाद भी मानसिक दासता के अवशेष आज भी मौजूद हैं।
इस मौके पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी भावनात्मक संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था आज मूर्त रूप ले चुकी है, और राम मंदिर का संघर्ष 500 वर्षों की उस यात्रा का परिणाम है, जिसे संतों, महंतों और समाज ने मिलकर आगे बढ़ाया। भागवत ने मंदिर के भव्य स्वरूप की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह स्वरूप हमारी सनातन परंपरा की शक्ति और समृद्धि को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अब समय है कि सनातन की ध्वजा को और ऊँचाइयों तक ले जाया जाए।
ध्वजारोहण समारोह ने 9 नवंबर 2019, 5 अगस्त 2020 और 22 जनवरी 2024 की तरह 25 नवंबर 2025 को भी इतिहास में अमर कर दिया। राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज की प्रतिष्ठा लाखों संतों, साधुओं और भक्तों के लिए एक अविस्मरणीय और भक्ति से भरा क्षण बनकर दर्ज हो गई।
अयोध्या में आयोजित यह भव्य आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि भारत की सभ्यतागत यात्रा में एक नई ऊर्जा और चेतना का संचार करता है।


