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उत्तर प्रदेश ह्यूमन राइट्स कमीशन ने डीएम बिजनौर से मांगी रिपोर्ट

15 अप्रैल 2026 तक जवाब तलब 

पीड़ित परिवार को ₹5 लाख मुआवज़े की मांग

दोषी अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश

आवारा कुत्तों के हमले पर प्रशासन से जवाब तलब

मानवाधिकार आयोग की सख्त दखल, पीड़ित को मुआवज़े की मांग

स्वतंत्र हित/विपिन दीक्षित 

बिजनौर/लखनऊ।

नजीबाबाद क्षेत्र में आवारा कुत्ते के हमले में बुज़ुर्ग फरीद अहमद के गंभीर रूप से घायल होने के मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था वर्ल्ड एक्रीडेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स (बोहर) ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायत पर संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश ह्यूमन राइट्स कमीशन ने जिलाधिकारी, बिजनौर से 15 अप्रैल 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने घटना की परिस्थितियों, नगर निकाय की कार्रवाई और भविष्य में रोकथाम के उपायों पर स्पष्ट जवाब मांगा है।

“अनुच्छेद 21 का उल्लंघन” – डॉ. ज़की

संस्था के नेशनल जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद तारिक जकी ने कहा कि जब नागरिक अपने घर के बाहर सुरक्षित नहीं हैं, तो यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने पीड़ित को ₹5 लाख का त्वरित मुआवज़ा देने, दोषी अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने और आवारा कुत्तों की समस्या पर समयबद्ध स्थायी समाधान लागू करने की मांग की है।

नगर पालिका की भूमिका पर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से आवारा कुत्तों की समस्या बनी हुई है, लेकिन नगर पालिका स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई। घटना के बाद प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

मॉनिटरिंग तंत्र की मांग

बोहर ने आयोग से यह भी आग्रह किया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी मॉनिटरिंग तंत्र विकसित किया जाए और नियमित समीक्षा की जाए।

अब नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर है कि क्या रिपोर्ट के बाद ठोस कदम उठाए जाएंगे या यह मामला भी कागज़ी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा।

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