विपिन दीक्षित/स्वतंत्र हित
उन्नाव। में पेड़ों की अवैध कटाई का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण की हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि जिस भूमि पर यह कटान की जा रही है, , इसके बावजूद लकड़ी माफिया खुलेआम आरा चला रहे हैं। इस अवैध कटाई से न केवल प्राकृतिक संतुलन को भारी नुकसान पहुंचा है, बल्कि पेड़ों पर आश्रित पशु-पक्षियों की मौत की भी आशंका जताई जा रही है।
यह मामला सोहरामऊ थाना क्षेत्र के अंतर्गत हसनापुर के पास दतौली का बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां नीम, गुड़हल, आम, गूलर और चिलवल जैसे हरे-भरे और उपयोगी पेड़ों को बेरहमी से काटा जा रहा है। दतौली क्षेत्र में नंबर दो किस्म की लकड़ी पर आरा गरजने की चर्चा आम है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कटाई सुनियोजित और संगठित तरीके से की जा रही है। बनी निवासी फौजी व अन्य साथियो के द्वारा हरे पेड़ो को क्षति पहुंचाई जाती है प
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सरकार एक ओर हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर वृक्षारोपण कराती है, ताकि पर्यावरण को बचाया जा सके, वहीं दूसरी ओर उसी सरकार की राजस्व भूमि पर खुलेआम पेड़ों का सफाया किया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि आखिर इस पूरे मामले का जिम्मेदार कौन है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि लकड़ी माफिया इतने बेखौफ हो चुके हैं कि उन्होंने थाना अध्यक्ष को तक खुली चेतावनी दी है। इससे प्रशासनिक सख्ती और कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि अवैध कटाई पर तत्काल रोक लगाई जाए, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और यह भूमि खाता 38 है और क्षेत्र में बड़ा कटान होता है साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।


