स्वतंत्र हित/ संवाददाता
कानपुर नगर। शहर में बढ़ती ठंड और शीतलहर को देखते हुए जिला प्रशासन ने आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि शीतलहर के दौरान थोड़ी सी सावधानी और सतर्कता से जनहानि के साथ-साथ गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से बचा जा सकता है। इसी क्रम में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से यह एडवाइजरी जारी की गई है।
जिलाधिकारी ने नागरिकों से अपील की है कि वे स्थानीय रेडियो, समाचार पत्र, टीवी चैनलों और मोबाइल अलर्ट के माध्यम से मौसम की ताजा जानकारी नियमित रूप से लेते रहें। कोयले की अंगीठी, मिट्टी तेल के चूल्हे, हीटर या ब्लोवर का प्रयोग करते समय विशेष सावधानी बरतें और कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन सुनिश्चित करें, ताकि जहरीली गैस या धुएं का जमाव न हो।
एडवाइजरी में कहा गया है कि शरीर को सूखा रखना बेहद जरूरी है। गीले कपड़े तुरंत बदलें। अत्यधिक ठंड के दिनों में जिन घरों में अलाव की व्यवस्था नहीं है, वे प्रशासन द्वारा चिह्नित सामुदायिक केंद्रों और आश्रय स्थलों पर जाएं, जहां अलाव की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
जिला प्रशासन ने गर्म कपड़ों के उपयोग पर भी जोर दिया है। कई परतों वाले ऊनी कपड़े, स्वेटर, टोपी और मफलर शीतलहर के प्रभाव को कम करते हैं। ऊनी कपड़ों की कमी होने पर दो-तीन कपड़े एक साथ पहनने की सलाह दी गई है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को अत्यधिक ठंड और कोहरे के दौरान यथासंभव घर के भीतर रखने की अपील की गई है। साथ ही शरीर की ऊष्मा बनाए रखने के लिए पोषक आहार, गर्म पेय पदार्थ और धूप का लाभ लेने की भी सलाह दी गई है।
जिलाधिकारी ने हाइपोथर्मिया और शीतदंश के लक्षणों को लेकर भी लोगों को सचेत किया। असामान्य रूप से शरीर का तापमान गिरना, भ्रम, स्मृति हानि, बेहोशी, अत्यधिक ठिठुरन, सुस्ती या तुतलाहट जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करने को कहा गया है। वहीं हाथ-पैर की उंगलियों, कान या नाक का सुन्न पड़ना या सफेद-पीले दाग दिखना शीतदंश का संकेत हो सकता है, जिस पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह आवश्यक है।
एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि आसपास अकेले रहने वाले बुजुर्गों और जरूरतमंद पड़ोसियों पर नजर रखें और आपात स्थिति में नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचना दें। पालतू पशुओं और पक्षियों के बाड़ों को ऊष्मा रोधी बनाने, खिड़की-दरवाजे ढकने के साथ वेंटिलेशन बनाए रखने की भी सलाह दी गई है। सिगड़ी, अंगीठी या अलाव सोते समय बुझाकर ही सोने और बंद कमरों में इन्हें जलाने से बचने को कहा गया है, ताकि आगजनी और दम घुटने जैसी घटनाएं न हों।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई निराश्रित, असहाय, विकलांग या बीमार व्यक्ति ठंड से प्रभावित दिखाई दे तो क्षेत्रीय लेखपाल के माध्यम से उन्हें निःशुल्क कंबल उपलब्ध कराने में सहयोग करें। मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें, अनावश्यक यात्रा से बचें, विंडप्रूफ और ढीले कपड़ों की कई परतें पहनें तथा विटामिन-सी युक्त फल-सब्जियों और गर्म तरल पदार्थों का नियमित सेवन करें।
जिला प्रशासन का कहना है कि सामूहिक जागरूकता और सतर्कता से शीतलहर के दुष्प्रभावों को काफी हद तक रोका जा सकता है।


