स्वतंत्र हित/संवाददाता
कानपुर। नौबस्ता चौराहे पर अवैध वसूली और प्राइवेट गाड़ियों के जमावड़े की समस्या लगातार भयावह रूप लेती जा रही है। रोजाना सैकड़ों वाहन चालकों और आम राहगीरों को इस अव्यवस्था के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, चौराहे पर प्राइवेट गाड़ियों के खड़े रहने से न केवल जाम की स्थिति बनती है बल्कि वसूली करने वालों और ऑटो चालकों के बीच आए दिन तीखी नोकझोंक और झड़प की घटनाएँ भी सामने आती रहती हैं। यह अवैध वसूली कोई नई बात नहीं है—स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिलसिला कई सालों से बिना रोक-टोक चल रहा है।
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि संबंधित अधिकारियों को स्थिति की कई बार जानकारी देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे लोगों में प्रशासन की भूमिका को लेकर गहरा आक्रोश है।
गौरतलब है कि वर्ष 2024 में इसी नौबस्ता चौराहे पर गोलीकांड की गंभीर घटना हुई थी, जिसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि अधिकारियों द्वारा सख्त कदम उठाए जाएंगे। लेकिन स्थिति फिर उसी ढर्रे पर लौट चुकी है।
स्थानीय लोगों का सवाल है—
क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहे हैं?
क्यों वर्षों से चल रही अवैध वसूली और जाम की समस्या पर कार्रवाई नहीं हो रही?
फिलहाल, नौबस्ता चौराहा लापरवाही, अव्यवस्था और वसूली तंत्र का प्रतीक बन चुका है, जहाँ हर दिन लोग जान जोखिम में डालकर गुजरने को मजबूर हैं, और प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।


