महमूद नगर में ग्राम प्रधान सर्वेश रावत ने लगवाए CCTV कैमरे
अभिषेक कुमार
लखनऊ,मलिहाबाद। गांवों में चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए विकासखंड मलिहाबाद की ग्राम पंचायत महमूद नगर के प्रधान सर्वेश रावत ने एक सराहनीय पहल की है। उन्होंने गांव की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नेजाभारी, खेड़ा, पाठकगंज व महमूद नगर के मुख्य मार्गों और प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए हैं। ग्राम प्रधान ने बताया कि पूरी ग्राम पंचायत में अब तक डेढ़ दर्जन कैमरे लगाए जा चुके हैं, शेष जगहों पर अभी और कैमरे लगाएं जाएंगे। इस कदम को ग्रामीणों ने एक बेहतरीन और दूरदर्शी निर्णय बताते हुए ग्राम प्रधान की जमकर प्रशंसा की।
हाल के महीनों में क्षेत्र के कई गांवों में चोरी और संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। ऐसे में ग्राम प्रधान सर्वेश रावत ने बिना किसी देरी के गांव की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का बीड़ा उठाया। उनकी पहल पर गांवों में कई स्थानों पर कैमरे लगाए गए हैं, जिससे गांव की हर गतिविधि अब कैमरों की निगरानी में रहेगी।
सर्वेश रावत ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल चोरी रोकना नहीं, बल्कि गांव में सुरक्षा और विश्वास का वातावरण बनाना है। उन्होंने कहा, हमारा गांव अब तकनीक से सुरक्षित रहेगा। अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति गांव में आता है, तो उसकी गतिविधि कैमरे में रिकॉर्ड हो जाएगी, जिससे पुलिस को भी मदद मिलेगी।
गांव के बुजुर्गों, युवाओं और महिलाओं ने प्रधान की इस पहल को बेहद सराहा। ग्रामीणों ने कहा कि यह कार्य सिर्फ एक सुरक्षा कदम नहीं, बल्कि ग्राम विकास की दिशा में उठाया गया एक आधुनिक सोच का उदाहरण है।
ग्रामवासी संतोष, अमन द्विवेदी, निदाफ और मोनू कश्यप ने कहा कि सर्वेश रावत हमेशा गांव के विकास के लिए सक्रिय रहते हैं, चाहे वह स्वच्छता अभियान हो, सड़क निर्माण, जल निकासी की व्यवस्था या अब सुरक्षा से जुड़ा यह बड़ा कदम।
गांव की गलियों में अब न केवल कैमरे लगे हैं, बल्कि लोगों में एक नया आत्मविश्वास भी पैदा हुआ है। वहीं महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को रात के समय भयमुक्त माहौल मिला है।
ग्रामीणों ने सर्वेश रावत को धन्यवाद देते हुए कहा कि ऐसा जागरूक और कर्मठ प्रधान ही गांव की असली पहचान होता है। ग्रामीण अब गर्व से कह रहे हैं कि हमारे प्रधान सर्वेश रावत सिर्फ नेतृत्व नहीं करते, बल्कि गांव की हर समस्या को अपना कर्तव्य समझकर हल करते हैं।
उनकी यह पहल न केवल अन्य ग्राम प्रधानों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी साबित करती है कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो सीमित संसाधनों में भी गांव को सुरक्षित और विकसित बनाया जा सकता है।


