“भारत-अमेरिका ट्रेड डील से देश की संप्रभुता को खतरा, सरकार ने अमेरिकी दबाव के आगे घुटने टेके”
स्वतंत्र हित/अंजनी बाजपेई
नई दिल्ली। लोकसभा में बजट सत्र के दौरान बुधवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। मार्शल आर्ट ‘जुजित्सु’ के दांव-पेंच का उदाहरण देते हुए राहुल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने हालिया भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के जरिए देश के हितों को अमेरिका के पास गिरवी रख दिया है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि इस डील से भारतीय किसानों और डेटा संप्रभुता को भारी नुकसान होगा।
“एकतरफा है यह ट्रेड डील”: राहुल के 5 बड़े आरोप
सदन में राहुल गांधी ने सिलसिलेवार तरीके से सरकार को घेरा:
किसानों के साथ धोखा: राहुल ने कहा कि अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करके सरकार ने भारतीय किसानों की कमर तोड़ दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब अमेरिकी सेब और बादाम भारतीय बाजारों पर कब्जा कर लेंगे।
डेटा संप्रभुता पर हमला: राहुल ने डेटा को ’21वीं सदी का सोना’ बताते हुए कहा कि सरकार ने 140 करोड़ भारतीयों का कीमती डेटा अमेरिकी कंपनियों के हवाले कर दिया है, जो भविष्य में AI के दौर में हमारी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।
जीरो टैरिफ’ पर सवाल: राहुल ने सवाल किया कि अमेरिका भारतीय सामानों पर 18% तक टैक्स वसूल रहा है, तो भारत ने अमेरिकी सामानों के लिए अपना दरवाजा पूरी तरह (0% टैरिफ) क्यों खोल दिया?
ऊर्जा सुरक्षा का अंत उन्होंने दावा किया कि इस समझौते के बाद भारत अब स्वतंत्र रूप से रूस या अन्य देशों से तेल खरीदने का फैसला नहीं ले पाएगा।
अडानी और विदेशी कंपनियां:
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां केवल चुनिंदा उद्योगपतियों और विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई जा रही हैं।
सदन में भारी हंगामा, सरकार का पलटवार
राहुल गांधी के भाषण के दौरान सत्ता पक्ष की ओर से भारी विरोध हुआ। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल के आरोपों को ‘निराधार और देश को गुमराह करने वाला’ बताया। रिजिजू ने कहा कि यह ट्रेड डील भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है और राहुल गांधी वैश्विक स्तर पर भारत की छवि खराब कर रहे हैं।
“युद्ध का युग खत्म नहीं, शुरू हुआ है”
प्रधानमंत्री के पुराने बयान पर तंज कसते हुए राहुल ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण खुद स्वीकार कर रहा है कि दुनिया अस्थिर है। यूक्रेन और पश्चिम एशिया के हालातों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हम युद्ध के युग में जी रहे हैं, लेकिन सरकार के पास इससे निपटने की कोई ठोस आर्थिक योजना नहीं है।


